बुरी नज़र लगने के लछण, कारण और आसान उपाय

दोस्तों आज हम बात करने जा रहे है बुरी नज़र लगने के लक्षण उनके कारण तथा बुरी नज़र उतरने के उपाय । तो सबसे पहले बात करते है बुरी नज़र के लक्षणों की ।


नज़र लगने के लक्षण - Nazar Lagne Ke Lakshan 


  • घर में बरकत ना होना ।
  • आपके ऊपर हमेशा कर्ज़ा रहना या बिना वजह से पैसो का नुक्सान ।
  • आपका या परिवार के किसी सदस्य का बार बार बीमार पड़ जाना ।
  • व्यापर में नुक्सान या नौकरी के किसी तरह की परेशानी ।
  • आपका काम बनते बनते रह जाना ।

नज़र लगने के कारण- Nazar Lagne ke Kaaran


  • आपकी सफलता देख कर किसी की हाय या बुरी नज़र लगना। 
  • यदि आपने अनजाने में किसी उतरे टोटके पर गलती से पैर रख दिया हो तो भी आपको बुरी नज़र लग सकती है ।
  • यदि आप अपनी सफलता या धन दौलत को लोगो के सामने अधिक उजागर करते है तो भी आपको बुरी नज़र लग सकती है ।

Nazar Suksha Kavach 

नज़र उतरने के 5 अचूक उपाय - Nazar Utarne Ke Upay 

लाल मिर्ची  उपाय 

सात साबुत लाल मिर्ची ले । उसे पीड़ित व्यक्तिके सीर पर सात बार वार के उसे जलती हुए अग्नि में डाल दे । ऐसा लगातार तीन दिन तक करे ।

तेल की बत्ती उपाय 

रुई की बत्ती ले उसे सरसो के तेल में भिगोलकर उसे पीड़ित व्यक्ति के सर से पैर तक सात बार उसारकर उसे जला दे । यह आप सात दिन तक  सुबह शाम करे ।

निम्बू उपाय 

एक निम्बू ले उसे पीड़ित के सर से पैर तक सात बार उसारकर  । निम्बू को चार टुकड़ो में काट ले फिर उसे किसी सुनसान जगह या चोराहे पर जाकर रख ले । ऐसा केबल रात के समय ही करे ।

दूध  उपाय 

आधा लीटर दूध ले उसे पीड़ित के सिर से लेकर पैर तक सात बार वार दे , फिर उस दूध को किसी काले कुत्ते को पिला दे । ऐसा लगातार तीन  दिन
 तक करे  ।

रोटी उपाय 

एक सरसो के तेल लगी हुए रोटी ले उसे सात बार पीड़ित के सिर से पैर तक उसारकर किसी गाय को खिला ले । ऐसा लगातार सात दिन तक करे ।

पूर्णिमा पर करे ये उपाय पल भर में होगा भाग्यदाय -Purnima ke Achuk Totke

दोस्तों आज हम पूर्णिमा के दिन करने वाले कुछ ऐसे टोटके बतायेगे । जिसे करने से आपके घर में कभी धन की कमी नहीं होगी और आपकी सभी परेशानिया दूर हो जायगी ।

पूर्णिमा क्या है ?
purnima ke upay
Purnima Ke Totke 

सबसे पहले आपको पता होना चाहिए की पूर्णिमा वाले दिन पूरा चाँद आकाश में दिखाई देता है जिसे हम आम भाषा में फुल मून (full-moon )भी कहते है हमारे हिन्दू धर्म में यह दिन बहुत ही महत्वपूर्ण दिन माना जाता है । पूर्णमाशी महीने में एक बार आती है आप हमारे द्वारा बताये गए उपाय करके आपने जीवन में खुशाली तथा सुख समृद्धि ला सकते हो ।

Purnima Ke Upay/ Totke -पूर्णिमा के टोटके / उपाय 

  • पूर्णिमा वाले दिन आप लोग लक्ष्मी जी को खीर का भोग लगाए । इस दिन ऐसा करने से आप को धन की प्राप्ति होगी Dhan Prpati Ke Upay ।
  • पूर्णिमा वाले दिन कोशिश करे की मॉस -मदिरा का सेवन बिकुल न करे । यदि आप ऐसा करते हो तो आपको मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है । 
  • पूर्णिमा वाले दिन आप माँ लक्ष्मी जी की पूजा करे तथा माँ लक्ष्मी को ११ कौड़ी चढ़ाये । इस के साथ ही हल्दी से तिलक भी करे । ऐसा करने से धन की प्राप्ति अवश्य ही होगी ।
  • पूर्णिमा वाले दिन आप आम के पत्ते को घर के मुखिया द्वार पर लगाए । और हर पूर्णिमा के दिन इसे बदले ऐसा करने से घर में शुभता आती है।  और वास्तु दोष निवारण भी होता है ।
  • थोड़ी सी हल्दी में गंगा जल मिला कर उस से घर के मुखिया द्वार पर बनाये । ऐसा करने से जितनी भी नकारात्मक शक्तिया है वो घर से दूर चली जायगी तथा घर में सकारात्मक शक्तियों का ही वास होगा |
  • पूर्णिमा वाले दिन भगवान शिव का अभिषेक अवश्य करे और शिवलिंग पर काला तील मिला कर दूध चढ़ाये । ऐसे करने से आपकी साडी मानसिक परेशानिया दूर हो जायेगी ।
  • पूर्णिमा के दिन रात के समय चाँद की पूजा जरूर करे और चन्द्रमा को खीर का भोग अवश्य लगाए । ऐसा करने से घर में बरकत बनी रहेगी ।

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पैसों में बरकत और सुख शांति के लिए अपनाएँ ये उपाय

दोस्तों आज हम बात करेंगे की पैसे की Barkat के लिए आपको कौन कौन से उपाय करने चाहिए ।Barkat  का सीधा मतलब होता है की घर में हर तरह से सुख समृद्धि रहना । जो की आजकल के भाग दौड़ भरे जीवन में बहुत मुश्किल सा हो गया है । किसी के पास पैसा है तो शांति और सुख नहीं है किसी के पास सुख शांति है तो पैसा नहीं है । इसलिए आज हम आपको  कुछ ऐसे Barkat Ke Upay बताऊगी जिसे जीवन में लाने से आपको जीवन में कभी धन और सुख समृद्धि की कमी नहीं होगी । और दिन प्रति दिन आपका खजाना बढ़ेगा ही ।
Barkat ke Achuk Upay


Bakat Ke Upay


  • घर की स्त्री का सम्मान करे । क्युकी स्त्री लक्ष्मी का रूप होती है ।
  • दक्षिण दिशा में पैर करके न सोये ।
  • जितना हो सके दान करे । हमारे हिन्दू शास्त्र में अन्न दान को सबसे बड़ा दान बताया गया है ।  तो अन्न का दान करे । क्युकी प्रकर्ति का नियम है आप जितना दान करोगी वो आपको दो गुना करके लौटा देगी ।
  • जब भी भोजन खाये सबसे पहले अग्नि को अर्पण करे । क्युकी अग्नि द्वारा पकाये गए भोजन पर सबसे पहला अधिकार अग्नि का ही होता है 
  • नल का टपकना आर्थिक तंगी का संकेत है । अगर आपके घर में भी ऐसा कुछ है तो जल्द से जल्द ठीक कराये ।
  • घर में जितना हो सके सफाई रखे ।
  • कुछ चावलों को हल्दी में मिला कर उन्हें तिजोरी में रखे । ऐसे करने से आपके तिजोरी में धन बढ़ेगा ।


 तो दोस्तों अगर आप इन उपाय को करते है तो आपके घर में तो Barkat होगी ही साथ ही आपके घर में सुख समृद्धि बनी रहेगी ।

shani dev ko khush karne ke upay

Today is Saturday, i.e. the day of worshiping shani dev ko khush karne ke upay  It is believed that Shani Dev gives the result of every good and bad act of human being. All of you will have heard that if Shane is angry at someone, then the person can have troubles in many ways. That is why people are very scared of Shani Dev and they like to find ways to make them happy. But only if Shani is happy with anyone, then that person gets success in every field. In the horoscope of a person's horoscope, it becomes a hindrance in his success.


 That is why today we are going to tell you some remedies, who make Saturn happy and give the fruits of desire. This measure should be done on Saturday



 1. Combine flour and sugars with black sesame on every Saturday and leave them to eat ants.

 2. If a person is not getting Satya Dev's grace, then make a ring from the black horse's cord or the boat of the boat and hold it in the middle finger on Saturday during sunset.

 3. If you want to chant his name 108 times for getting freedom from Shani. The names are as follows - Kangra, Pingal, Bhabru, Krishna, Rudranatak, Yama, Sauri, Shanashcher, Dhind, Pippa.

 4. Donate today donations. Donate black sesame, black cloth, blankets, iron utensils, garland pulses today. From this Saturn will be happy and will also give fruit.
5. If the monkey is the form of Hanuman ji, then in this way monkeys feed jaggery and gram. Every Saturday, read Hanuman Chalisa. By worshiping Hanuman ji, the person does not have to face Saturn defects.


  On this day, worship Shani Dev and offer them blue flowers. With this, chant Shani Mantra Oon Shank Shanishchai Naem 108 times from Rudraksh's garland. Do this every Saturday so that the shyness of Shani's body is removed from your head.


   After bathing in the morning, take a mustard oil in a bowl and see your face in it. Then donate this oil to any poor person. With this God will be happy and your destiny will change and obstacles will be far away.
 If you wish, take your morning morning bath to peepal tree. After that, circularly round the same peepal tree. Burns near the peepal tree in the temple. 9. Take water in copper lace and put black sesame in it. Then take this water on Shivling. By doing so, the person will be free from all diseases and will get rid of financial hardships with the grace of Bholenath.

Remedies To Get Rid Of Evil Eye

Nazar Utarna


Getting affected by evil eyes (nazar Utarne Ke Upay ) is quite common in many cultures. 'Evil eye' usually refers to a magical glance which may or may not be intentional. It is believed that if you are affected by the evil eye of a person out of jealousy or extreme admiration, you may fall sick or something really bad may happen to you. Though, these beliefs can be called superstitions yet, many religions recognise it's bad effects on people.




The spell cast on a person by an 'evil eye' is said to have the ability to injure, cause physical and mental imbalances in the person affected. In most cases casting an evil eye is unintentional. For example, on seeing a cute baby people tend to unknowingly cast an evil eye and then the baby suffers from illness later on. But in other cases, an evil eye may be cast intentionally to ruin a person's life or property. People who put these spells intentionally on others are usually born on specific days and possess strong magnetic power. The worst part is that they are aware of these powers and make use of it to make others suffer. So, today we will tell you how you can recognize an evil eye and remedies that you can try to get rid of it.


How To Recognize Evil Eye 


To find out whether you have been affected by an evil eye, there are a few ways which are tried out: A drop of oil is put into a glass of water and a chant is recited. 


If the oil does not dissolve, it means you have been affected by an evil eye. 



Another way is to burn a wick on a metal spoon. A cotton wick is dipped in oil and lighted on a metal spoon. Then with the help of tongs the wick is removed from the spoon and turned upside down. The level of the fire determines how badly you have been affected by an evil eye. If the fire has high flames it means you have been affected. 


Remedies For Evil Eye -Nazar Utarne Ke upay


If any of your family members is suddenly suffering from a chronic illness and you doubt that it is because someone cast an evil eye, then try the following: Take sea water in a bottle. Distill it using a cloth. Mix cow's urine in a small proportion to this and store the water. Keep this in a bottle and spray this inside all the rooms of the house on Tuesday, Friday, full moon day and a new moon day. The one who is affected will be cured. 



If you are going through a rough patch in your business, it may be the effect of an evil eye. So, try this remedy. Place a lemon on a glass full of water. Make sure that the glass is a transparent one. Keep the glass in a place where it is visible to everyone. Change the water of the glass everyday. On every Saturday, replace the lemon with a new one. The evil eye cast by your competitors will soon be removed.


Sometimes, children suffer from sudden stomach ache. In most cases they suffer from the effects of an evil eye. If you are facing such a situation then try this: Take a small amount of sand and mix it with mustard. Then gently put this mixture on your child's stomach. Keep for sometime. Then remove the mixture which is applied on the stomach and put it in the fire. It will effectively remove the evil.

भगवान शिव परिवार: तस्वीरें, सदस्य और कहानियां

 Shiv Parivar 

भगवान शिव अनंत, सर्वशक्तिमान और सर्वव्यापी है। हर जगह उनकी मौजूदगी है।

उनके पास अब तक का सबसे बड़ा परिवार है।

उनके परिवार की महानता आश्चर्यजनक है, भक्ति, सत्य और आत्मसमर्पण से भरा है।



और इस लेख में, मैं भगवान शिव परिवार के सदस्यों का वर्णन विभिन्न कहानियों और दिलचस्प पाठों से करता हूं जो हम उनसे सीख सकते हैं। मैंने दिव्यता के साथ जीवन भरने के लिए महादेव के परिवार की कुछ तस्वीरें भी अपलोड कीं।

Members Of Shiv Parivar

सर्वोच्च, सर्वशक्तिमान भगवान शिव और उनके परिवार का परिचय

भगवान शिव वह है जो किसी के द्वारा जानना असंभव है। उनमें से सरलता यह है कि वे सांप पहनते हैं, हाथ में त्रिशूल हैं, ध्यान में हैं। लेकिन उनके पास समय के छोटे अंश में सबकुछ बनाने की शक्ति भी है। यहां तक कि समय भी उनके द्वारा बनाया गया है। उनमें से शक्ति अकल्पनीय है, भले ही सभी पुराण उन्हें समझाए जाने के लिए असंभव कहें। वे कैलासा में रहते हैं जो भौतिक आयामों से परे है। मानव के कल्याण के लिए, वे वास्तविक रूप के साथ-साथ अवतार के साथ पृथ्वी में आते हैं। वास्तविक रूप में जिसे महेश के नाम से भी जाना जाता है, उनके पास दो पत्नियां हैं।


  • देवी सती
  • देवी पार्वती

लेकिन हकीकत में उनके पास केवल एक पत्नी है।

देवी शक्ति उन्हें पहले अवतार में सती के रूप में शादी करती है और दूसरी अवतार में, वह पार्वती है।

पहले अवतार में, देवी शक्ति दक्ष से सती के रूप में पैदा हुई थी। लेकिन क्योंकि दक्ष महादेव का अपमान करते हैं, वह इस शरीर से दूर जाती है।

दूसरे अवतार में, वह हिमालय के घर में पार्वती के रूप में पैदा हुईं। तपस्यार्य द्वारा, उन्हें भगवान शिव को पति के रूप में मिलता है।

उनके पहले पुत्र, कार्तिकेय हैं जो ताराकासुरा को मारते हैं और हर किसी को खतरे से बचाते हैं।

दूसरा पुत्र गणेश है, किसी भी देवता से पहले पहली पूजा का आशीर्वाद प्राप्त करें। एक घटना में, वह अपनी मां और पिता के परिक्रमा द्वारा प्रतिस्पर्धा जीतते हैं जबकि कार्तिकेय पूरी दुनिया के परिक्रमा करते हैं।

गणेश की दो पत्नियां हैं।

पत्नियों का नाम रिद्धि और सिद्धी, सिद्धि शक्ति और धन का कारण है। उनमें से सुभाष सुभा और लाभा हैं।

इसलिए, भगवान शिव का पारिवारिक पेड़ शिव पुराण के अनुसार होगा:



भगवान शिव की बेटी भी है जिसका उल्लेख पद्म पुराण में किया गया है।

उसका नाम अशोक सुंदरी है। देवी को याद करके, पापों से जीवन मिटा दिया जाएगा और स्वर्ग के द्वार हमारे लिए खुलेंगे।

भगवान शिव के अन्य पुत्र और बेटियां हैं जो अयप्पा, अंधखासुरा, जलंधरा, मनसा और विष्णुमाय हैं जो उनके लिलास के हिस्से के रूप में हैं। Shiv Parivar 




Rog Mukti Ke Upay | Rog Nivaran Mantra

Rog Mukti




दोस्तों यदि आपके घर या घर के आस पास लोग बीमारी से परेशान रहते है तो आज हम आपको रोग मुक्ति के उपाय बताने जा रहे है । यदि हमारे दुवरा बताये गए उपाय को आप पुरे विश्वास के साथ करेगी तो आपको फायदा अवश्य ही होगा .. लेकिन साथ में आपको आपने कर्मा नहीं छोड़ने कहने का मतलब है की डॉक्टर से दवाई लेना . यदि आप कर्म और उपाय साथ में करेगी तो आपको जल्द ही बीमारी से मुक्ति मिल  जायगी । इसलिए आज हम आपको रोग मुक्ति और रोग निवारण के कुछ उपाय बताने जा रहे है जिसे आप आपने घर में बहुत ही आसानी से कर सकते है  उसका असर आपको खुद ही देखने को मिलेगा । एक बात हमेशा  याद रखना की कर्म ही सबसे ऊपर है ज्योतिष केबल रहा दिखता है

 रोग मुक्ति के उपाय -Rog Mukti Ke Upay


मंगलवार या शनिवार के दिन हनुमान जी की मूर्ति से सिंदूर लेकर बीमार व्यक्ति के माथे पर लगा देना उससे उसे बीमारी से लड़ने में बहुत मदद मिलेगी । वः जल्दी ही खुद को ठीक महसूस करने लगेगा ।

 यदि कोई व्यक्ति बहुत समय से बीमार है तो उस के लिए आप उसके सिरहाने के निचे पीपल की जड़ रख दे । आप खुद को जल्द ही ठीक महसूस करने लगेगी ।

रोगी इंसान को सुबह एक गिलास पानी पूर्व दिशा की तरफ मुंह करके ” एँ ” मंत्र का जाप 21 बार करके उस पानी को पीना चाहिए। एैसा सात दिनों तक लगातार करें। जिसकी शुरूआत रविवार के दिन से करनी चाहिए।

रोग मुक्ति मंत्र - Rog Mukti Mantra




जो जटिल रोग से पीड़ि‍त हों, उन्‍हें हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए. वैसे तो श्रद्धालु पूरी हनुमान चालीसा का पाठ किया करते हैं. परंतु रोग नाश के लिए हनुमान चालीसा की इन चौपाइयों और दोहों को मंत्र की तरह जपने का विधान है:

1. बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवनकुमार। 
बल बुधि बिद्या देहु मोहि हरहु कलेस बिकार।

2. नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।

इस दोहे के जप से हर तरह के रोग, शारीरिक दुर्बलता, मानसिक क्‍लेश आदि दूर होते हैं. खास बात यह है कि हनुमानजी के उपासक को सदाचारी होना चाहिए. सदाचार से वे प्रसन्‍न होते हैं और मनोकामनाओं को पूरा करते हैं.

What is Kaal Sarp Yantra, Mantra, Puja, Effect, Remedy?

काल मौत के लिए एक और शब्द है। मौत के पास काल सर्प योग के चेहरों के तहत पैदा होने वाला व्यक्ति लगभग पूरे जीवन का अनुभव करता है। संघर्ष काल सर्प योग के साथ पैदा हुए लोगों के जीवन का नियम है। यह काल सर्प योग बनाया जाता है जब सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आते हैं। राहु को नाग  के रूप में भी जाना जाता है और केतु को पूंछ के रूप में भी जाना जाता है। काल सर्प  योग के साथ पैदा होने वाले विभिन्न प्रकार की परेशानी और समस्याएं। जानिये  Kaal Sarp dosh Nivaran पूजा कैसे करे
kaal sarp yog


काल सर्प योग से पीड़ित लोगों को नाग पंचमी के दिन पूजा करने और अपने घरों में एक सक्रिय काल सर्प  यंत्र लगाने की सलाह दी जाती है। काल सर्प  यंत्र उपयोगकर्ता को काल सर्प  योग के बुरे परिणामों से बचाता है। यह यंत्र व्यक्ति को हर नौकरी में सफलता प्राप्त करने में मदद करेगा जो अन्यथा काल सर्प  योग के कारण संभव नहीं होगा। ऊर्जावान काल सर्प  यंत्र व्यक्ति को बाधाओं को दूर करने और सफलता प्राप्त करने में मदद करेगा।

kaal sarp dosh nivaran


यह यंत्र मनुष्य द्वारा बनाया जाता है और इसे वेदों से मंत्रों के माध्यम से सक्रिय किया जाना चाहिए ताकि यह व्यक्ति को उच्च शक्ति से जुड़ने में मदद मिल सके। यंत्र को सक्रिय करने की यह प्रक्रिया पुजारी द्वारा की जाती है। घरों में इस ऊर्जाग्रस्त यंत्र को रखने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है और इसे सही तरीके से पालन किया जाना चाहिए। काल सर्प  यंत्र रखने की प्रक्रिया निम्नलिखित है:




  • यंत्र रखने से पहले पहला  शरीर को शुद्ध करना और मन को किसी भी बुरे और नकारात्मक विचारों से मुक्त करना है।
  • इसके बाद, उस मंजिल पर एक जगह ढूंढना है जो पूर्वनिर्धारित है और पूर्व दिशा का सामना कर रहा है
  • दीपक या धूप जलाओ।
  • वेदी पर एक ताजा फल और फूल रखें।
  • यंत्र को भगवान की एक तस्वीर के साथ रखना जो यंत्र प्रतीक है।
  • इसके बाद, किसी भी पेड़ से किसी भी पत्ते से पानी लें और अपने आप को और फिर वेदी पर छिड़क दें।
  • अब अपनी आंखें बंद करें और सभी ईमानदारी से उच्च शक्ति पर ध्यान दें और प्रार्थना करें कि भगवान आपकी सभी इच्छाओं को पूरा करें।


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Amir Banne Ke Aassan Or Achuk Tarike

Amir Banne Ke Tarike

Duniya mein pratyek vyakti Amir  banana chaahata hai usake lie mehanat to sab karate hain, lekin har vyakti Amir nahin banata. Isake kaaran hai chuninda aadaten. apane dam par ameer banane mein talamatol kee aadat nahin hotee hai. ve paise ka behatar upayog karate hain. unhen gussa bhee kam aata hai.

Amir Banne Ke Totke 


1. Dhan sambandhee kaary mein saphalata praapt hain to ek neemboo ke oopar chaar laung gaad den aur om shree hanumante namah mantr ka jaap 21 baar karen. usake baad us laung vaale neemboo ko apane saath le lete hain. aisa karane se aapake sabhee kaam saphal ho ja rahe hain aur aap karodapati banane se koee nahin rokathaaga.

2. yadi aapaka dhan sambandhit koee kaary aapakee ichchha ke badale ho raha hai, to isake lie aap kapoor aur ek phool kee laung ek saath jalaakar teen-chaar din mein thodee-thodee khaee lete hain, aisa karane se aap kaam kar sakate hain raha hai, vo band ho aur manachaaha kaam hone lagega aur dhan kee varsha hogee.

3. ek leep lene aur usamen 7-8 laung daalakar shanivaar kee shaam ko ghar ke kisee kone mein rakhakar jala den. ise 7 shanivaar tak jaaree rakhen. aisa karane se ghar se adhik nakaaraatmak oorja door ho jaata hai aur lakshmi ka aagaman hota hai.

4. subah pooja ke baad aaratee kar samay apane deepak mein do laung daalakar aaratee karen. ya kapoor mein do phooladaar laung daalakar aaratee karen. isase tumhaara sab kaam aasaanee se banane lagenge aur kisee prakaar kee baadha nahin aagee.

5. kachchee ghaanee ke tel ke deepak mein laung daalakar hanumaan jee kee aaratee karane se anachaahe door hota hai aur achaanak Lakshmi prapti  hotee hai.

ye aasaan se Amir  banane ke tarike  aapake jeevan ko sanvaarakar khushiyon se bharane vaale hain. to doston kyon na aap bhee laung ke chhote se prayog se apane kismat ke taare chamakaen.


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shiv parivar-

शिव के परिवार (shiv parivar) में अद्भुत बात है। विभिन्नताओं में एकता और विषमताओं में संतुलन यह शिव परिवार से ही सीखा जा सकता है। शिव परिवार के हर व्यक्ति के वाहन या उनसे जुड़े प्राणियों को देखें तो शेर-बकरी एक घाट पानी पीने का दृश्य साफ दिखाई देगा।

शिवपुत्र कार्तिकेय का वाहन मयूर है, मगर शिवजी के तो आभूषण ही सर्प हैं। वैसे स्वभाव से मयूर और सर्प दुश्मन हैं। इधर गणपति का वाहन चूहा है, जबकि सांप मूषकभक्षी जीव है। पार्वती स्वयं शक्ति हैं, जगदम्बा हैं जिनका वाहन शेर है। मगर शिवजी का वाहन तो नंदी बैल है। बेचारे बैल की सिंह के आगे औकात क्या?
परंतु नहीं, इन दुश्मनियों और ऊंचे-नीचे स्तरों के बावजूद शिव का परिवार शांति के साथ कैलाश पर्वत पर प्रसन्नतापूर्वक समय बिताता है।


कहते हैं कि शिव-पार्वती चौपड़ भी खेलते हैं, भांग भी घोटते हैं। गणपति माता-पिता की परिक्रमा करने को विश्व-भ्रमण समकक्ष मानते हैं। स्वभावों की विपरीतताओं, विसंगतियों और असहमतियों के बावजूद सब कुछ सुगम है, क्योंकि परिवार के मुखिया ने सारा विष तो अपने गले में थाम रखा है।
विसंगतियों के बीच संतुलन का बढ़िया उदाहरण है शिव परिवार। जिस घर में शिव परिवार का चित्र लगा होता है वहां आपस में पारिवारिक एकता, प्रेम और सामजस्यता बनी रहती है।

हनुमान कवच

हनुमान कवच

हम हनुमान कवच हनुमान कवच के बारे में बात करने से पहले, हमें यह जानने की जरूरत है। हनुमान कवच क्यों आयोजित किया जाता है? आखिरकार, लाभ क्या है कि व्यक्ति का जीवन खुशी लाता है। "हनुमान बलवान" हनुमान जी की शक्ति और ज्ञान की भविष्यवाणी नहीं कर सकते हैं। लेकिन हर कोई अपनी शक्ति के बारे में व्यवहार्य है। हनुमान जी, जो श्री राम जी के एक सच्चे भक्त थे।



 हिंदी में hanuman kavach

आज भी अगर एक भक्त के बारे में बात की जाती है, तो पहला ध्यान बजरंग बाली की तरफ जाता है। कहा जाता है। जो भी राम जी से पहले देखना चाहता है, श्री हनुमान जी को सताया जाना है। हनुमान जी उत्कृष्ट, विद्वान, प्रतिभाशाली, मजबूत, समृद्ध, बुद्धिमान, जानकार, मजबूत थे। अपनी बुद्धि के साथ राम किसने जीता था।









जानें कि हनुमानजी खुद को करीब रखने के करीब रखती है



 हिंदी में हनुमान कवच
लॉकेट hanuman raksha mantra का अर्थ हिंदी में है

श्री राम के सबसे मूल्यवान नौकर हनुमान जीवित रहने के स्थान पर अभी भी जीवित हैं। वे सबकुछ देख सकते हैं। इंशान उन्हें एक सच्चे दिल से याद करता है। और वे हमेशा उनकी मदद के लिए उपस्थित होते हैं। कभी उन्हें पीड़ित न होने दें। हनुमान जी की पूजा करके, जीवन को बड़े दुखों से दूर किया जा सकता है। लेकिन वह व्यक्ति जो हनुमान कवच या परेशानी में पड़ने वाले व्यक्ति के पाठ में मर जाता है वह भी परेशान है। यह रोग दुःख से छुटकारा पाता है। हनुमान आर्मर सिद्ध बड़े काम के लिए उपयोगी है। जिसका प्रभाव किसी भी बुराई से दूर किया जा सकता है। यह कवच आपको चालबाजी और काले जादू से बचाता है। यह पूरी तरह से पराजित है। हनुमान जी की पूजा





पंचमुखी hanuman kavach बेनिफिट्स

hanuman kavach के कई फायदे हैं। इस कवच को पकड़कर, आप भूत से छुटकारा पा सकते हैं। यदि आपके राशि चक्र में चंदल या राक्षस बंदूक है, तो आपको इसे पहनना चाहिए। और यह कवच आपको अन्य दुष्ट आत्माओं से बचाता है। इसका एक और फायदा यह है कि यह कवच आपको टोनो टोको से बचाता है। और आपको बचाता है। और काले जादू इस पर पूरी तरह से पराजित हो जाता है। इस कवच के पूर्ण लाभ के साथ, जीवन का सभी दुख गायब हो जाता है। साथ ही जीवन में जो भी परेशानियां हैं। इस कवच को पकड़कर, भगवान हनुमान हर पल हर पल अपने साथ रखता है। और वे हर बार अपने भक्तों की मदद करते हैं। वे किसी भी परेशानी की अनुमति नहीं देते हैं। लेकिन यह केवल पहनने से लाभ नहीं उठाता है। आपको कुछ अन्य उपचार भी करना है।



पंचमुखी हनुमान कवच मंत्र पंचमुखन हनुमान  मंत्र

पंचमुखी हनुमान रक्षा  मंत्र

यह पहनने से आपको सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। लॉकेट में इसकी इतनी शक्ति है। आपको कभी भी कोई दुख नहीं है। हनुमान स्वयं अपने सुरक्षात्मक कवच से ऐसा करते हैं। वे मिनटों में आपकी समस्याओं को हटा देते हैं। इस कवच को पकड़ने के लिए कोई शुभ चीज़ चुनें। लेकिन मंगलवार मंगलवार दिन। फिर सुबह में, स्नान करने के बाद, यह कवच हनुमान जी की मूर्ति के सामने रखना है। हनुमान जी से प्रार्थना करें कि उसे इस कवच में अपनी शक्ति देनी चाहिए जो मुझे सभी गलत चीजों को करने से रोकती है। मुझे और मेरे परिवार को खुशी से भरें। इसके बाद, हनुमान चालिसा को अपने दिमाग में 7 बार पढ़ा जाना है। बाद में, इस मंत्र का जप करने के लिए, "हान हनुमांते नमः" 108 बार और फिर आप इस कवच पहन सकते हैं।



मंगलवार को हनुमान की पूजा, मनोकम्ना पुरी को जानें

हनुमान कवच ऑनलाइन हनुमान कवच ऑनलाइन खरीदते हैं

आपको यह कवच ऑनलाइन भी मिलता है। लेकिन कुछ लोग मानते हैं कि ऑनलाइन खरीदारी करना नकली या असली होगा, यह पता लगाना मुश्किल है। आइए आज आपको बताएं कि आप कैसे जानेंगे कि यह असली या नकली है या नहीं। जब भी आप होंनुआन कैच ऑनलाइन खरीदना भी एक तरीका है। तो ध्यान रखें कि ताले वहां हैं। उस पर, हनुमान जी की मूर्ति लाल रंग के साथ मूर्ति बनाई जाएगी। जब आप इसे ध्यान से देखते हैं, तो जय श्री राम इस पर प्रकट होते हैं। यदि आप इसे देखते हैं तो यह वास्तविक होगा। इसके अलावा, आप हमारे द्वारा इस लॉकेट को भी खरीद सकते हैं। जो आपको पूर्ण गारंटी देता है।

हनुमान कवच ऑनलाइन हनुमान कवच ऑनलाइन खरीदते हैं



हनुमान रक्षा मंत्र भारतीय पौराणिक कथाओं में, भगवान हनुमान को शक्ति और शक्ति का देवता माना जाता है। और हर मंगलवार को हनुमान जी द्वारा पूजा की जाती है और मंगलवार को केवल हनुमान जी की पूजा ने श्री राम जी को वरदान दिया था। कोई भी जो मंगलवार को हनुमान जी को चोल देता है। वह अपने दिल को जीतना चाहता है। हनुमान जी की कृपा उस व्यक्ति पर रखी जाती है जो हनुमान जी को सम्मिलित करता है। हर मंगलवार को लाखों पूजा करने वालों की पूजा की जाती है।



इस आज रात को जानें, हनुमान जी का गुप्त रहस्य, सोने से पहले पढ़ा, आपके घर के लिए बरसात होगी



एक मुखी हनुमान कवच एक प्रतीक हनुमान  लॉकेट

हनुमान कवच या लॉकेट भी कहा जा सकता है और कुछ लोग इसे मुक्ति हनुमान कवच भी कहते हैं, लेकिन सभी का एक ही अर्थ है; इस पर पहने हुए, कोई उदासी से मुक्त हो जाता है, कोई भी उसे खराब नहीं कर सकता है। हनुमान जी सादेव उनके साथ रहते हैं, काम सफल हो जाता है, पैसा महसूस होता है। और हर काम करने की शक्ति। हनुमान जी खुद की शक्ति क्यों है, हनुमान जी अच्छा, विद्वान, गुणकारी, मजबूत, समृद्ध, बुद्धिमान, जानकार, शक्तिशाली क्यों है। नकारात्मक ऊर्जा ऊर्जा से सुरक्षा को हटा देती है।

hanuman kavach

Hauman kavach
Before we talk about Hanuman kavach Hanuman Kavach, we need to know this. Why is Hanuman armor held? After all, what are the benefits that the person's life brings happiness to. "Hanuman Balwan" can not predict the power and wisdom of Hanuman ji. But everyone is viable about their power. Hanuman ji, who was a true devotee of Shri Ram Ji.

Hauman kavach in hindi Hanuman Kavach in Hindi
Even today if a devotee is talked about, then the first meditation goes towards Bajrang Bali. Is called. Whoever wants to see Ram ji Prior to that, Mr. Hanuman ji has to be persecuted. Hanuman ji was excellent, scholar, talented, strong, rich, intelligent, knowledgeable, strong. Who had won Ram with his intellect.



Know that Hanumanji keeps himself close to keeping him close

Hauman kavach in hindi Hanuman Kavach in Hindi
Hauman kavach in hindi

Locket Hanuman kavach meaning in hindi


Hanuman, the most valued servant of Shri Ram, is still alive in some place at the place of living. They can see everything. The Inshan remembers them with a true heart. And they are always present for their help. Never let them suffer any more. By worshiping Hanuman ji, life can be overcome by bigger sorrows. But the person who dies in the text of Hanuman Kavach or the person who is in trouble is also upset. The disease gets rid of grief etc. Hanuman Armor is useful for proven bigger work. The effect of which can be overcome by any evils. This armor protects you from trickery and black magic. It is completely defeated. hanuman ji ki pooja


Panchmukhi Hanuman kavach benifits




Armor has many advantages. By holding this armor, you can get rid of ghosts. If you have Chandal or monster gun in your zodiac, then you should wear it. And this armor saves you from other evil spirits. Another advantage of this is that this armor protects you from Tono Totco. And protects you. And black magic gets completely defeated on this. With the full benefit of this armor, all the grief of life disappears. At the same time whatever troubles are there in life. By holding this armor, Lord Hanuman keeps himself with you every moment every moment. And they help their devotees every time. They do not allow any trouble. But this does not benefit from wearing only. You also have to do some other remedies.

Panchmukhi Hanuman Kavach Mantra Panchamukhan Hanuman Armor Mantra
Panchmukhi Hanuman Kavach Mantra
Panchmukhi Hanuman Kavach Mantra


Wearing this gives you positive energy. It has so much power in the locket. You never have any grief. Hanuman himself does it by his own protective armor. They remove your problems in minutes. Choose any auspicious thing to hold this armor. But Tuesday tuesday day. Then in the morning, after bathing, it is to keep this armor in front of the statue of Hanuman ji. Pray to Hanuman ji That he should give his power in this armor that will prevent me from doing all the wrong things. Fill me and my family with happiness. After this, Hanuman Chalisa is to be read in his mind 7 times. Later, to chant this mantra, "Han Hanumante Namah:" 108 times and then you can wear this armor.

Know the worship of Hanuman on Tuesday, Manokamna Puri



Hanuman kavch online Hanuman armor buy online
You also get this armor online. But some people believe that buying online will be fake or real, it is difficult to find out. Let's tell you today how you will know whether it is real or fake. This is also a way to buy hanuman kavch online whenever you are. So keep in mind that the locks are there. On that, Hanuman ji's idol will be sculpted with red color. When you look at it carefully, then Jai Shri Rama appears on it. If you see it then it will be real. Apart from this, you can buy this locket by us also. Which gives you full guarantee.
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Hanuman raksha mantra In Indian mythology, Lord Hanuman is considered to be the god of power and power. And every Tuesday is worshiped by Hanuman ji and on Tuesday only Hanuman ji ki puja had given a boon to Shri Ram ji. Anyone who gives a Chola to Hanuman ji on Tuesday. He wishes to win his heart. The grace of Hanuman ji is maintained on the person who inserts Hanuman ji. Millions of worshipers are worshiped every Tuesday.

Know this tonight, Hanuman ji's secret secret, read before bedtime, will be rainy for your home

Ek Mukhi Hanuman Kavach An Emblem Hanuman Armor Locket
Hanuman kavach or locket can also be said and some people also call it a Mukti Hanuman Kavach, but all have the same meaning; Wearing on this, one becomes free from sadness, no one can spoil him. Hanuman ji sadev lives with him, work gets success, money is realized. And the power to do every work. Why is the power of Hanuman ji himself near you, why is Hanuman ji good, scholar, virtuous, strong, rich, intelligent, knowledgeable, powerful. Negative energy removes protection from energy.

Amavsya Ke Din Kya Kre Or Kya Na Kre ?

amavasya ke din bhaakhal bhee na kare aap kaam - maheena mein ek baar amaavasya aur ek baar poornima ka din hota hai. amaavasya ko ababh din maanate hain kyonki is din nakaaraatmak oorja ka prabhaav bahut adhik hota hai. parantu pooja, jap ke lie yah din bahut bahut shubh hota hai. isake alaava bhagavaan prabhu hai. is din shubh kaary ko nahin karana chaahie anyatha laabh kee jagah haani hone kee sambhaavana jaayada rahatee hai. chandrama man ka kaarak hai isalie is din man bahut asantulit hota hai vaidhata ke anusaar amaavasy ke din bahut se kaam karane ke lie nishedh kiya gaya hai karane ke lie jeevan mein pareshaaniyon takaleeph ko ka saamana karana pad sakata hai is post mein ham aapako bataenge amaavasya ke din kaun se kaam karate hain bhool bhoolakar bhee nahin karana chaahie.

दोस्तों ये पढ़ना ना भूले Amavsya Ke Upay Hindi Me 

amaavasy ke din bhool kar nahin yah kaam karate hain

amaavasy ke din shamashaan bhoomi ke aasapaas ya andar jaane se har varg ke logon ko nahin jaana chaahie kyonki is din aur raat mein nakaaraatmak shaktiyon ka prabhaav bahut adhik hota hai jo, aap ko apane chapet mein le kar aap ko nukasaan pahuncha sakate hain. maanasik aur shaareerik in takaleeph se se pareshaan kar sakate hain. to jahaan tak ​​ho sakata hai shmashaan bhoomi amaavasya ke din nahin jaana chaahie.

mehandee, baragad, imalee, maulaseeree, peepal ke pedo ke neeche nahin jaana chaahie. kyooee in pedo par bhoot, pret ka vaas hota hai. jo amaavasya ko adhik shaktishaalee ho jaata hai. yah aap apane vesh mein kar aap dukhee kar rahata hai. in pedo ke sameep jaane se bhee is din chalana chaahie.

koee mahatv nirnay lene se bachana chaahie kyookee is din man ka santulan saamaany na hone kee vajah se koee bhee mahatvapoorn aur bada nirnay galat saabit ho sakata hai. jyotish shaastr ke anusaar chandrama man ka kaarak hota hai, aur is din chandrama na dene kee vajah se man mein asahajata banee rahatee hai. to aap dvaara liya nirnay mein pareshaanee mein daal sakata hai. isalie usake bachane kee jarurat hotee hai.

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amaavastha kee tithi ke devata pitar devata hote hain. ghar mein sukh shaanti aur khushee ka maahaul pitaron kee krpa kee se banata hai. pitaro ko khush karane aur krpa paane ke lie jahaan tak ​​ho sakata hai aap par aur kaaboo rakho kisee se bina kaaran gaalee galauj maar-peet na karen. ghar mein pyaar ka paryaavaran banaakar rakhen. jap pooja paath kare. aisa karane se pitar khush hokar apana aasheervaad dete hain. is din hone vaale ghar ke klesh se pitr roote hain. aap aur aapake parivaar ko kaaphee pareshaaniyon ka saamana karana pad sakata hai.

Amavsya din gareeb ya jarooratamand insaan kee madad karen. madad bhee kar kar to, kam se kam usaka apamaan na karen. usake dil ko na dukhaaye. gareeb aadamee ke dil ko thes pahunchane se shani aur raahu-ketu roosht ho jaate hain aur unake prakop se aapaka jeevan mein uthal-puthal mach ho sakata hai.



जानिये क्या है व्यापार में वृद्धि के तरीके ?


Vyapar Me Safalta Ke Upay


दोस्तों आज हम व्यापर  से सम्बंधित विषयो पर विस्तार पूर्वक चर्चा करेंगे और जानेगे की कैसे आप अपने कारोबार या व्यवसाय (Business) को दिन दोगुना रात चौगुना कर सकते है| अगर हम व्यापर  की बात करे तो हर आदमी  चाहता  है कि उसे कारोबार में अच्छा मुनाफा हो और वो अपनी सभी प्रकार कि आवश्यकताओ की पूर्ति कर सके| इसी बारे  में हम जानेगे कि कैसे हम अपने व्यापर में  वृद्धि ला सकते है और ज्यादा से ज्यादा फायदा  अर्जित कर सकते है| हम आपको कारोबार में वृद्धि के लिए कुछ  ऐसे अचूक  उपाय /टोटके /मंत्र बतायेगे जिनके द्धारा आप आसानी से कारोबार में ढेर सारा धन कमा कर सकेंगे और अपने सभी सपनो को साकार कर सकेंगे|



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अगर आपके कारोबार में घाटा हो रहा है या उधारी बहुत ज्यादा चल रही तो इस परेशानी को दूर करने के लिए भी आप इन टोटको का प्रयोग कर सकते है जिससे की आपका व्यापर फायदा  प्रदान करेगा|

व्यापर  में वृद्धि के चमत्कारी टोटके- Vyapar me vridhi ke upay


माता लक्ष्मी को धन की देवी माना जाता है और ऐसी मान्यता है की अगर माँ लक्ष्मी जी की कृपा किसी पर हो जाये तो वो व्यक्ति धन-धान्य से मालामाल हो जाता है| इसलिए घर की तिजोरी में लक्ष्मी यन्त्र की स्थापना करे और माँ लक्ष्मी की पूजा अर्चना करे|

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भगवन शिव को देवो देव कहा जाता है और वो अकेले ही ऐसे देव हो जो कि अतिशीघ प्रसन्न हो जाते है| इसलिए सोमवार के दिन कारोबार पर जाने से पहले शिव मंदिर जाकर कच्चा दूध और केसर का तिलक करे| ऐसा करने से भगवन शिव की असीम कृपा आप पर बनी रहेगी और धन में कभी कमी नहीं होगी|

Barkat Ke Upay 

खाना खाने से पहले एक रोटी गाय को और एक कुत्ते को जरूर डाले अगर आप इस प्रकार 7 दिन तक करते है तो अवश्य ही आपको कारोबार से सम्बंधित एक अच्छी खबर सुनने को मिलेगी|

मंगलवार के दिन माता के मंदिर जाकर अगर आप चुनरी चढ़ाते है या बजरंबली को सिन्दूर लगते है तो आपकी सभी मनोकामनाएं बहुत जल्द पूरी होती है|



शनिवार के दिन भगवान शनि को तेल चढ़ाने से व्यापर और कारोबार में आ रही सभी समस्याए दूर हो जाती है|

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इस प्रकार बताये गए उपायों को करने से आपके करोबार में वृद्धि होनी शुरू हो जाएगी| व्यापर में सफलता पाने के अचूक उपाय का उल्लेख लाल किताब में किया गया है जिसके द्धारा आप कारोबार में सफलत्र प्राप्त  vyapar me safalta ke upay कर सकते है|  अगर आप किसी भी प्रकार की जानकारी व्यापर या कारोबार में सफलता के टोटके पाना और जानना चाहते है तो आप किसी भी समय हमारे पंडित जी से सम्पर्क कर सकते है|


इन अचूक उपायों से होगी धन की बरकत और कई परेशानी होगी दूर!



धन की बरकत के उपाय – दोस्तों आज के समय में भी हर कोई पूजा – पाठ पूरी आस्था के साथ करता है.
लेकिन इसके बावजूद पूर्ण रूप से भगवान का आशीर्वाद शायद हमें नहीं मिल पाता. क्या आपने कभी सोचा है कि इतनी आस्था के बावजूद पूर्णरूप से हम अपनी जिंदगी से खुश क्यों नहीं रह पाते. कहीं – ना – कहीं आपको लगता होगा कि आप से कहीं कोई चूक नहीं रहती.

लेकिन आज हम आपको कुछ ऐसी बातें बता रहे हैं, जिसे जानकर आपको समझ में आ जाएगा कि हम छोटी-छोटी ऐसी कौन सी गलतियां करते हैं जिसके कारण हमें लाभ मिलने के बजाए हानी उठानी पड़ती है.

तो चलिए दोस्तों हम आपको बताते हैं धन की बरकत के उपाय – किस तरह इन छोटी-छोटी बातों को अपने रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल कर आप भी बन सकते हैं धनवान और दूर रख सकते हैं कई परेशानियों को अपनी जिंदगी से.

धन की बरकत के उपाय –Dhan Ki Barkat Ke Upay


1 – पीपल के पेड़ के नीचे हनुमान चालीसा का पाठ


हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए. इससे कार्यों में आनेवाली हर तरह की बाधाएं दूर हो जाती हैं.

2 – नहीं जलाना चाहिए अगरबत्ती


हमारे शास्त्रों में ऐसी बातों का उल्लेख मिलता है जिसे हम अगर अपनी दिनचर्या में अपनाएं तो हम अपनी जिंदगी की परेशानियां दूर कर सकते हैं. जैसे कि लोग अगरबत्ती जलाते हैं. इसके बावजूद की बांस की लकड़ी जलाना मना है. शायद आपको पता हो कि अगरबत्तियां बांस की हीं बनाई जाती है. और इस बात का पता शायद हीं किसी को हो की अगरबत्ती जलाने से पितृदोष लगता है.

इस बात की जानकारी हम सबको होनी चाहिए कि शास्त्रों में पूजन विधान के लिए कहीं भी अगरबत्ती का उल्लेख नहीं किया गया है. हर जगह धूप का हीं उल्लेख मिलता है. पूजा पाठ करते समय बहुत सारी ऐसी बातें हैं जिनके बारे में हम नहीं जानते. जो बातें बहुत हीं ज्यादा महत्वपूर्ण होती है.

3 – जूठन का ध्यान रखें


सुबह को बिना कुल्ला किए चाय या पानी नहीं पीना चाहिए. झूठे हाथों से कभी भी अग्नि, ब्राह्मण तथा गौ को स्पर्श नहीं करना चाहिए. देवी – देवताओं को चढ़ाए गए फूल या हार के सूख जाने पर घर में रखना हानिकारक होता है.

4 – धनहानि बंद होने के उपाय


परिवार के प्रत्येक सदस्यों के सिर पर सात बार काले तिल से उसार करने के बाद उत्तर दिशा की ओर फेंक दें. इससे धन हानि बंद होती है. हर शनिवार को काले कुत्ते को कड़वे तेल से चुपड़ी हुई रोटी खिलाना चाहिए. शाम के समय भोजन करना, पढ़ना और सोना नहीं चाहिए.  प्रत्येक दिन सोने से पहले अपने पैरों को ठंडे पानी से धोएं. लेकिन ध्यान रखें कि गीले पैर भूलकर भी न सोएं. इससे धन की हानि होती है. जब भी भोजन करें उत्तर या पूर्व की ओर मुख करके ही करें. और संभव हो तो रसोईघर में बैठकर हीं भोजन करना चाहिए. इससे राहु शांत होता है. कभी भी जूते पहन कर भोजन नहीं करना चाहिए.

5 – रात को ना करें ये भोजन

रात के खाने में भूलकर भी सत्तू दही और चावल का सेवन ना करें. इससे लक्ष्मी का निरादर होता है.

6 – पीपल का पौधा लगाने से शांत हो जाते हैं सारे ग्रहदोष

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ज्योतिष के अनुसार जो व्यक्ति पीपल का पौधा लगाता है. और उसकी देखभाल करता है. उसकी कुंडली के सारे ग्रह दोष शांत हो जाते हैं. जैसे-जैसे पीपल बड़ा होता है. इसके घर – परिवार में सुख – समृद्धि भी बढ़ती जाती है. कोई व्यक्ति अगर पीपल के पेड़ के नीचे शिवलिंग की स्थापना खर नियमित रूप से उसकी पूजा – अर्चना करता है, तो उसकी सभी समस्याएं खत्म हो जाती है. इस तरह के उपाय से बुरे समय धीरे – धीरे टल जाते हैं.
ये है धन की बरकत के उपाय – दोस्तों ये कुछ ऐसे अचूक उपाय हैं, जिन्हें आप अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अपना कर सारी परेशानियों से छुटकारा पा सकते हैं. और इन सारे उपायों से माता लक्ष्मी Lakshmi prapti ke upay  की अपार कृपा प्राप्त होती है. जिससे आपके amir banne  ke tarike के सारे रास्ते खुल जाते हैं.

hanuman kavach-जानिए hanuman kavach के अचूक फायदे

Panchmukhi Hanuman Kavach in Hindi

 

श्रीगणेशाय नमः ।
ॐ श्री पञ्चवदनायाञ्जनेयाय नमः । ॐ अस्य श्री
पञ्चमुखहनुमन्मन्त्रस्य ब्रह्मा ऋषिः ।

गायत्रीछन्दः । पञ्चमुखविराट् हनुमान्देवता । ह्रीं बीजं ।
श्रीं शक्तिः । क्रौं कीलकं । क्रूं कवचं । क्रैं अस्त्राय फट् ।
इति दिग्बन्धः । 
hanuman kavach

श्री गरुड उवाच ।

अथ ध्यानं प्रवक्ष्यामि श्रृणुसर्वाङ्गसुन्दरि ।
यत्कृतं देवदेवेन ध्यानं हनुमतः प्रियम् ॥ १॥

पञ्चवक्त्रं महाभीमं त्रिपञ्चनयनैर्युतम् ।
बाहुभिर्दशभिर्युक्तं सर्वकामार्थसिद्धिदम् ॥ २॥

पूर्वं तु वानरं वक्त्रं कोटिसूर्यसमप्रभम् ।
दन्ष्ट्राकरालवदनं भृकुटीकुटिलेक्षणम् ॥ ३॥

अस्यैव दक्षिणं वक्त्रं नारसिंहं महाद्भुतम् ।
अत्युग्रतेजोवपुषं भीषणं भयनाशनम् ॥ ४॥

पश्चिमं गारुडं वक्त्रं वक्रतुण्डं महाबलम् ॥

सर्वनागप्रशमनं विषभूतादिकृन्तनम् ॥ ५॥

उत्तरं सौकरं वक्त्रं कृष्णं दीप्तं नभोपमम् ।
पातालसिंहवेतालज्वररोगादिकृन्तनम् ॥ ६॥

ऊर्ध्वं हयाननं घोरं दानवान्तकरं परम् ।
येन वक्त्रेण विप्रेन्द्र तारकाख्यं महासुरम् ॥ ७॥

जघान शरणं तत्स्यात्सर्वशत्रुहरं परम् ।
ध्यात्वा पञ्चमुखं रुद्रं हनुमन्तं दयानिधिम् ॥ ८॥

खड्गं त्रिशूलं खट्वाङ्गं पाशमङ्कुशपर्वतम् ।
मुष्टिं कौमोदकीं वृक्षं धारयन्तं कमण्डलुम् ॥ ९॥

भिन्दिपालं ज्ञानमुद्रां दशभिर्मुनिपुङ्गवम् ।
एतान्यायुधजालानि धारयन्तं भजाम्यहम् ॥ १०॥

प्रेतासनोपविष्टं तं सर्वाभरणभूषितम् ।
दिव्यमाल्याम्बरधरं दिव्यगन्धानुलेपनम् ॥ ११॥

सर्वाश्चर्यमयं देवं हनुमद्विश्वतोमुखम् ।
पञ्चास्यमच्युतमनेकविचित्रवर्णवक्त्रं
शशाङ्कशिखरं कपिराजवर्यम ।
पीताम्बरादिमुकुटैरूपशोभिताङ्गं
पिङ्गाक्षमाद्यमनिशं मनसा स्मरामि ॥ १२॥

मर्कटेशं महोत्साहं सर्वशत्रुहरं परम् ।
शत्रु संहर मां रक्ष श्रीमन्नापदमुद्धर ॥ १३॥

ॐ हरिमर्कट मर्कट मन्त्रमिदं
परिलिख्यति लिख्यति वामतले ।
यदि नश्यति नश्यति शत्रुकुलं
यदि मुञ्चति मुञ्चति वामलता ॥ १४॥

ॐ हरिमर्कटाय स्वाहा ।
ॐ नमो भगवते पञ्चवदनाय पूर्वकपिमुखाय
सकलशत्रुसंहारकाय स्वाहा ।

ॐ नमो भगवते पञ्चवदनाय दक्षिणमुखाय करालवदनाय
नरसिंहाय सकलभूतप्रमथनाय स्वाहा ।

ॐ नमो भगवते पञ्चवदनाय पश्चिममुखाय गरुडाननाय
सकलविषहराय स्वाहा ।

ॐ नमो भगवते पञ्चवदनायोत्तरमुखायादिवराहाय
सकलसम्पत्कराय स्वाहा ।

ॐ नमो भगवते पञ्चवदनायोर्ध्वमुखाय हयग्रीवाय
सकलजनवशङ्कराय स्वाहा ।

ॐ अस्य श्री पञ्चमुखहनुमन्मन्त्रस्य श्रीरामचन्द्र
ऋषिः । अनुष्टुप्छन्दः । पञ्चमुखवीरहनुमान् देवता ।

हनुमानिति बीजम् । वायुपुत्र इति शक्तिः । अञ्जनीसुत इति कीलकम् ।
श्रीरामदूतहनुमत्प्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।
इति ऋष्यादिकं विन्यसेत् ।

ॐ अञ्जनीसुताय अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।
ॐ रुद्रमूर्तये तर्जनीभ्यां नमः ।
ॐ वायुपुत्राय मध्यमाभ्यां नमः ।
ॐ अग्निगर्भाय अनामिकाभ्यां नमः ।
ॐ रामदूताय कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।
ॐ पञ्चमुखहनुमते करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ।
इति करन्यासः ।

ॐ अञ्जनीसुताय हृदयाय नमः ।
ॐ रुद्रमूर्तये शिरसे स्वाहा ।
ॐ वायुपुत्राय शिखायै वषट् ।
ॐ अग्निगर्भाय कवचाय हुम् ।
ॐ रामदूताय नेत्रत्रयाय वौषट् ।
ॐ पञ्चमुखहनुमते अस्त्राय फट् ।
पञ्चमुखहनुमते स्वाहा ।
इति दिग्बन्धः ।

अथ ध्यानम् ।

वन्दे वानरनारसिंहखगराट्क्रोडाश्ववक्त्रान्वितं
दिव्यालङ्करणं त्रिपञ्चनयनं देदीप्यमानं रुचा ।
हस्ताब्जैरसिखेटपुस्तकसुधाकुम्भाङ्कुशाद्रिं हलं
खट्वाङ्गं फणिभूरुहं दशभुजं सर्वारिवीरापहम् ।

अथ मन्त्रः ।

ॐ श्रीरामदूतायाञ्जनेयाय वायुपुत्राय महाबलपराक्रमाय
सीतादुःखनिवारणाय लङ्कादहनकारणाय महाबलप्रचण्डाय
फाल्गुनसखाय कोलाहलसकलब्रह्माण्डविश्वरूपाय
सप्तसमुद्रनिर्लङ्घनाय पिङ्गलनयनायामितविक्रमाय
सूर्यबिम्बफलसेवनाय दुष्टनिवारणाय दृष्टिनिरालङ्कृताय
सञ्जीविनीसञ्जीविताङ्गदलक्ष्मणमहाकपिसैन्यप्राणदाय
दशकण्ठविध्वंसनाय रामेष्टाय महाफाल्गुनसखाय सीतासहित-
रामवरप्रदाय षट्प्रयोगागमपञ्चमुखवीरहनुमन्मन्त्रजपे विनियोगः ।

ॐ हरिमर्कटमर्कटाय बंबंबंबंबं वौषट् स्वाहा ।
ॐ हरिमर्कटमर्कटाय फंफंफंफंफं फट् स्वाहा ।
ॐ हरिमर्कटमर्कटाय खेंखेंखेंखेंखें मारणाय स्वाहा ।
ॐ हरिमर्कटमर्कटाय लुंलुंलुंलुंलुं आकर्षितसकलसम्पत्कराय स्वाहा ।
ॐ हरिमर्कटमर्कटाय धंधंधंधंधं शत्रुस्तम्भनाय स्वाहा ।
ॐ टंटंटंटंटं कूर्ममूर्तये पञ्चमुखवीरहनुमते
परयन्त्रपरतन्त्रोच्चाटनाय स्वाहा ।

ॐ कंखंगंघंङं चंछंजंझंञं टंठंडंढंणं
तंथंदंधंनं पंफंबंभंमं यंरंलंवं शंषंसंहं
ळंक्षं स्वाहा ।
इति दिग्बन्धः ।

ॐ पूर्वकपिमुखाय पञ्चमुखहनुमते टंटंटंटंटं
सकलशत्रुसंहरणाय स्वाहा ।

ॐ दक्षिणमुखाय पञ्चमुखहनुमते करालवदनाय नरसिंहाय
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः सकलभूतप्रेतदमनाय स्वाहा ।
ॐ पश्चिममुखाय गरुडाननाय पञ्चमुखहनुमते मंमंमंमंमं
सकलविषहराय स्वाहा ।

ॐ उत्तरमुखायादिवराहाय लंलंलंलंलं नृसिंहाय नीलकण्ठमूर्तये
पञ्चमुखहनुमते स्वाहा ।

ॐ उर्ध्वमुखाय हयग्रीवाय रुंरुंरुंरुंरुं रुद्रमूर्तये
सकलप्रयोजननिर्वाहकाय स्वाहा ।

ॐ अञ्जनीसुताय वायुपुत्राय महाबलाय सीताशोकनिवारणाय
श्रीरामचन्द्रकृपापादुकाय महावीर्यप्रमथनाय ब्रह्माण्डनाथाय
कामदाय पञ्चमुखवीरहनुमते स्वाहा ।

भूतप्रेतपिशाचब्रह्मराक्षसशाकिनीडाकिन्यन्तरिक्षग्रह-
परयन्त्रपरतन्त्रोच्चटनाय स्वाहा ।
सकलप्रयोजननिर्वाहकाय पञ्चमुखवीरहनुमते
श्रीरामचन्द्रवरप्रसादाय जंजंजंजंजं स्वाहा ।
इदं कवचं पठित्वा तु महाकवचं पठेन्नरः ।
एकवारं जपेत्स्तोत्रं सर्वशत्रुनिवारणम् ॥ १५॥

द्विवारं तु पठेन्नित्यं पुत्रपौत्रप्रवर्धनम् ।
त्रिवारं च पठेन्नित्यं सर्वसम्पत्करं शुभम् ॥ १६॥

चतुर्वारं पठेन्नित्यं सर्वरोगनिवारणम् ।
पञ्चवारं पठेन्नित्यं सर्वलोकवशङ्करम् ॥ १७॥

षड्वारं च पठेन्नित्यं सर्वदेववशङ्करम् ।
सप्तवारं पठेन्नित्यं सर्वसौभाग्यदायकम् ॥ १८॥

अष्टवारं पठेन्नित्यमिष्टकामार्थसिद्धिदम् ।
नववारं पठेन्नित्यं राजभोगमवाप्नुयात् ॥ १९॥

दशवारं पठेन्नित्यं त्रैलोक्यज्ञानदर्शनम् ।
रुद्रावृत्तिं पठेन्नित्यं सर्वसिद्धिर्भवेद्ध्रुवम् ॥ २०॥

निर्बलो रोगयुक्तश्च महाव्याध्यादिपीडितः ।
कवचस्मरणेनैव महाबलमवाप्नुयात् ॥ २१॥

॥ इति श्रीसुदर्शनसंहितायां श्रीरामचन्द्रसीताप्रोक्तं
श्रीपञ्चमुखहनुमत्कवचं सम्पूर्णम् ॥


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Kaal Sarp Dosh Kya hai? Kaal Sarp Dosh Nivaran Kaise Kre ?

kabhee-kabhee aisa hota hai ki hamaare jeevan mein itanee uthal-puthal aur itanee aarthikata se shaareerik, maanasik pareshaanee hotee hai ki ham samajh nahin paate hain ki yah see samasya hai. ise ya to ham khud kismat mon lete hain ya phir bhagavaan ko kosate rahate hain ki bhagavaan kee vajah se yah sab ho raha hai.


lekin aap jaanate hain ki tumhaaree kundalee mein koee samasya ho sakatee hai jisaka kaaran hai pareshaaniyon ka saamana karana pad raha hai. isake baad kisee jyotish kee sharan mein jaane hai ki aakhiree samasya kya hai. agar aapaka janm kundalee mein kaal sarp dosh hota hai. kaal sarp dosh sunakar aap darane kee jarurat nahin hai.



isake baaren mein agar thodee see bhee jyotish jaanakaaree de de to aap is kaalasarp yog se nivaaran mil sakata hai. ya phir aap khud kuchh upaay apana khud ka saamana karana padata hai. jaanie kya hai kaalasarp yog aur yah kaise pahachaane ki aapake kundalee mein kaun sa kaal sarp dosh nivaran hai.

jab raahu aur ketu sada vakree (ultee chaal) rahate hain. kisee bhee vyakti kee janm kundalee mein jab sabhee grah raahu aur ketu ke beech aate hain to vyakti kaalasarp yog se peedit ho jaata hai. kaal sarp dosh har raashi ke jaati ke lie samaan nahin padatee hai. yah raashi ke anusaar alag-alag prabhaav dikhaatee hai.



kaal sarp yog ek tarah ke nahin raashiyon kee tarah 12 prakaar ke hote hain. jinake alag-alag prabhaav aur vishesha upaay hota hai. jinako apanaakar aap in kaal sarp dosh  nivaran paavar hai.

anant kaal sarp dosh


jab kundalee mein raahuda mein aur ketu aapoorti mein ho aur vah beech sabhee grah hon to anant naamak kaalasarp yog banata hai. aise kalaakaaron ke vyaktitv nirmaan mein kathin parishram kee jaroorat padatee hai. usake vidyaalay aur vyavasaay ke kaam bahut saamaany tareeke se chalate hain aur in kshetron mein thoda bhee aage badhane ke lie jaatik ko kathin sangharsh karana padata hai.



maanasik peeda kabhee-kabhee use ghar-grhasthee chhodakar vairaagee jeevan apanaane ke lie bhee ukasaaya hain. laataree, sheyar aur sood ke vyavasaay mein aise hee kalaakaaron kee vishesh ruchi rahatee hain kintu bhee inhen jyaada haani hee hota hai. shaareerik roop se use kaee vyaadhiyon ka saamana karana padata hai. jisase aapakee aarthik sthiti kharaab ho jaatee hai aur daapatin jeevan mein bhaasnaanee aane lagatee hai.



kulik kaal sarp dosh


raahu doosare ghar mein ho aur ketu ashtam sthaan mein ho aur sabhee grah in grahon ke beech mein ho to kulik naam kaalasarp yog hoga. jaatik ap apayash ka bhee paart banana padata hai. is yog kee vajah se jaatik kee padhaee-likhaee saamaany gati se chalatee hai aur usaka vaivaahik jeevan bhee saamaany rahata hai. lekin aarthik pareshaaniyon ke kaaran aapake daapatin jeevan mein khalabalee machee rahatee hai.



apane doston se dhokha, santaan sukh mein baadha aur vyavasaay mein sangharsh kabhee usaka peechha nahin chhodana. saath hee aapaka svabhaav bhee badale mein hota hai. saath hee tumhaaree maanasik aur shaareerik pareshaanee se bhee gujarana padata hai.



vaasuki kaal sarp dosh


raahu teesare ghar mein aur ketu navam sthaan mein aur is beech sabhee grah gret ho to vaasukee naamak kaalasarp yog banata hai. vah bhaee-bahan se bhee pareshaan rahata hai. any paarivaarik sadasyon se bhee aap kheenchate banee rahatee hai. rishtedaar aur mitragan aap hamesha dhokha dete hain.


ghar mein hamesha kalah rahata hai. saath hee aarthik sthiti bhee asaadhaaran rahatee hai. arthopaarjan ke lie janak ko vishesh sangharsh karana padata hai, phir bhee usamen saphalata sampragadha rahatee hai. chandrama ke peedit hone ke kaaran usaka jeevan maanasik roop se udghoshana rahata hai. is yog ke kaaran jaatik kaanoonee maamalon mein vishesh roop se nukasaan uthaana padata hai


Shankhapaal kaal sarp yog



raahu chauthe sthaan mein aur ketu dasham sthaan mein ho isake beech sabhee grah ho to shankhapaal naamak kaalasarp yog banata hai. isase ghar- sampatti sambandhit thodee bahut kathinaiyon aatee hain. jisaka kaaran jaatik kabhee-kabhee tanaav mein aa jaata hai.



jaatik ko maata se koee, na koee kisee na kisee samay aanshik roop mein takaleeph milatee hai. saath hee vaivaahik jeevan saamaany roop se bhee vah kabhee-kabhee tanaavagrast ho jaata hai. chandrama ke peedit hone ke kaaran jaati samay-samay par maanasik santulan khoya rahata hai.



kaary ke kshetr mein bhee kaee vighn aate hain. par ve sab vighan kaalantar mein svachaalit: nasht ho jaate hain. is yog ke prabhaav se jaati ka aarthik santulan bigad jaata hai, jo kaaran aarthik sankat bhee upasthit ho jaata hai.



Padm kaal sarp yog

raahu pancham aur ketu ekadash bhaav mein aur is beech sabhee grah hon to padm kaalasarp yog banata hai. gyaan praapt karane par thodee samasya uthaana hota hai. saath hee getak ko santaan praayah vilamb se praapt hota hai, ya santaan hona mein bhaagyashaalee roop se vyavadhaan upasthit hota hai.



jaatik ko putr santaan kee praayah chinta banee rahatee hai. saath hee svaasthy sambandhee samasya bhee ho sakata hai. parivaar mein jaatik ko apayash mil ka bhee bhay bana rahata hai. isee kaaran yah hamesha tanaavagrast rahata hai.



Mahaapadm kaal  sarp yog


raahu chhathe bhaav mein aur ketu baarahave bhaav mein aur usake beech sabhee grah avasthiti hon to mahaapadm kaalasarp yog banata hai. is yog mein jaati shatru vijeta hota hai, videshon se vyaapaar mein laabh kamaata hai lekin baahar adhik rahane ke kaaran usake ghar mein shaanti ka asabhaav rahata hai.



is yog ke jaatik ko ek hee cheej mil sakata hai dhan ya sukh. is yog ke kaaran jaatik yaatra bahut karata hai use poora karane mein bhee milatee hai parantu kaee baar apano dvaara dhokha khaana ke kaaran unake man mein niraasha kee bhaavana jaagrt ho uthatee hai aur vah apane man mein shatruta paalakar rakhane vaala bhee hota hai.



Tachar kaal sarp yog


ketu mein aur raahu saptam sthaan mein ho to tachar naamak kaalasarp yog banata hai. is kaalasarp yog se peedit jaatiyaan ko paitrk sampatti ka sukh nahin mil paata. aise getak prem prasang mein bhee asaphal ho dekhe jaate hain.



gupt prasangon mein bhee unhen dhokha khaana padata hai. vaivaahik jeevan saamaany rahate hue bhee kabhee-kabhee sambandh bahut tanaavapoorn ho jaata hai jisase ki aap ko hone ke lie kosis kar raha hai.



karkok kaal sarp yog


ketu doosare sthaan mein aur raahu ashtam sthaan mein karkok naam kaalasarp yog banata hai. aise jaati ke bhaag bhaagyoday mein is yog kee vajah se kuchh rukaavaten avashy aatee hain. naukaree mil aur padonnati hona mein bhee kathinaiyon aatee hain. is jaati ke lie sampatti bhee aate-aate rah rahatee hai. koee bhee kaam theek tareeke se nahin ho paata hai. saath hee aap adhik parishram karane ke baad bhee laabh nahin mil paata hai.

Shankhachud kaal sarp yog


ketu teesare sthaan mein aur raahu navam sthaan mein shankhachud naamak kaalasarp yog banata hai. is yog se peedit jaatiyon ke bhaagyoday hone mein kaee prakaar kee adachane aatee rahatee hain. vyaavasaayik pragati, naukaree mein pronnati aur padhaee-likhaee mein vaanchhit saphalata mil mein jaatiyaan ko kaee prakaar ke vighnon ka saamana karana padata hai. isake peechhe kaaran vah svayan hota hai kyonki vah apano ka bhee hissa chhinana chaahata hai. apane jeevan mein dharm se khilavaad karata hai.



adhik soch ke kaaran shaareerik vyaadhiyaan bhee usaka peechha nahin chhodatee. in sab kaaranon ke kaaran sarakaaree mahamon aur mukadamebaajee mein bhee unake dhan kharch hota hai rahata hai. usake pita ka sukh to bahut kam milaakar hai, vah nanihaal aur bahanoon se bhee chhala jaata hai. saath hee aapaka dost bhee aap dhokha kar raha hai.



Ghaatak kaal sarp yog


ketu chaturth aur raahu dasham sthaan mein ho to ghaatak kaalasarp yog banaate hain. is yog mein utpann jaatik agar maan kee seva kare to behatar ghar aur sukh kee prastuti hotee hai. jaatik hamesha jeevan paryavet sukh ke lie prayaasasheel rahata hai usake paas haina hee sukh aate hain jee nahin bharata hai.



usake pita ka bhee vichhoh jhelana padata hai. daapatin jeevan bhee pareshaaniyon se bhara hota hai. naukaree peshedaar jaatiyaan kosend, dischaarj ya dimoshan ke khataron se roobaroo hona padata hai. saajhedaaree ke kaam mein bhee manamutaav aur ghaata aadi ho sakata hai.



Vishaila kaalasarp yog


ketu pancham aur raahu gyaarahave bhaav mein ho to vishadaar kaalasarp yog banaate hain. jaatik ko gyaanaarj karane mein aanshik vyavadhaan upasthiti hota hai. uchch shiksha praapt karane mein thodee bahut baadha aatee hai aur smaran shakti ka hamesha hraas hota hai.



jaatik ko naana-naanee, daada-daadee se laabh kee sambhaavana bheed aanshik nukasaan uthaana padata hai. chaacha, chachere bhaiyon se kabhee-kabhee jhagada- jhanjhat bhee ho jaata hai. bade bhaee se vivaad hone kee prabal sambhaavana rahatee hai. is yog ke kaaran jaati apane janm sthaan se bahut door nivaas karata hai ya phir ek sthaan se doosare sthaan par bhraman kar rahata hai.

Sheshanaag kaal sarp yog


ketu chhathe aur raahu baarahave bhaav mein ho aur isake beech sabhee grah aa jaaye to sheshanaag kaalasarp yog banata hai. shaastron ke anusar vyavahaar mein log is yog sambandhee baadhaon se peedit avashy dekhe jaate hain. is yog se peedit jaati kee jaroorat hai manokenaen hamesha vilamb se hee poorn hota hai.



aise jaatiyaan ko apana khud-rotee kamaane ke lie apane janmasthaan se door jaana padata hai aur shatru shadayantron se use hamesha vaad-vivaad aur mukadame baajee mein phanse rahana padata hai. unake sir par badanaamee kee kataar hamesha latakee rahatee hai. shaareerik aur maanasik vyaadhiyon se aksar use vyathit hona padata hai. usake kaam karane ka tareeka bhee niraala hota hai. vah kharch bhee aamadanee se adhik kiya jaata hai.

Prem Mandir Vrindavan ,Mathura

prem mandir vrindavan वृंदावन का प्रेम मंदिर बहुत प्रसिद्ध है प्रेम मंदिर की स्थापना किपलू महाराज जी ने १४ जनवरी २००१ को लाखो श्रद्धालुओ...